Wednesday, 2 April 2014

मेरे माता पिता

आज लिखने बैठी हूँ अपनी जीवन कहानी
मै हूँ अपने माता पिता की प्यारी से रानी
अपने जीवन का हर सुख मेरे नाम कर दिया
मेरे सपनो पर खुद को कुर्बान कर दिया
मुझमे देखा पर अपने सपनो को बलिदान कर दिया
मुझमे देखा उन्होंने अपना बचपन
मुझमे चाहा उन्होंने अपना दर्पण
गुण संस्कार व्यव्हार उन्होंने अपना भर दिया
जिससे मेरा जीवन खुशियों से भर गया
मेरी माँ तो जैसे है एक सहेली
जो सुलझाती है मेरी हर पहेली
मुझे गुरु की है क्या जरुरत
मेरे माता पिता ही पूरी करते हसरत
लौकिक या अलौकिक ज्ञान जो मैंने चाहा
ताली बन ताला खोला हर राह को सुलझाया
मैंने पूछा एक सवाल आपके बाद मेरा कौन मेरा जवाब
मेरे सवालों का ईश्वर को बताया मेरा जवाब
मैंने तो अपने आप को सौप दिया उसे
आगे मर्जी उसकी वो रखे जैसे मुझे
जालिम दुनिया से बचाया मेरे माता पिता ने मुझे
इसलिए पहले पूजा उनकी बाद में ध्यान दूंगी तुझे
मेरी भावना को तूने अपने लिए इस्तेमाल किया
हर किसी के दुःख दर्द मिटाने के लिए मेरा हाथ चुन लिया
किन्तु जब मेरे हाथ में लिखे दुःख दर्द को मिटाने की बारी आयी
दुनिया की हर राह बंद करके करके तूने अपनी सूरत दिखायी
तेरी रहमत ने मेरी किस्मत को चमका दिया
मेरी बिगड़ी हुई थी उसे तूने बना दिया
मेरे माता पिता निस्वार्थ भाव से मुझे अपना सब देते चले गए
मेरे ऋण चुकाने की कोशिश  पर ही अनमोल आशिषो के खजाने लुटाते गए
तुझे तो सारी दुनिया महान कहती है
मेरे जीवन में यह बात सच बैठती है
यदि तेरी कृपा मुझ पर न होती
तो माता पिता जैसे मोती मुझे न मिलती
कैसे जानती तू और तेरा प्यार कैसा है
कैसे मानती तू मेरे माता पिता जैसा है
इन मोती को गले में बाँधकर ह्रदय के पास रखूंगी
इनसे अपने जीवन रूपी शरीर का श्रृंगार करुँगी 

No comments:

Post a Comment